Dusra Mauka दूसरा मौका

 



“पर जैसे ही रोहित और महिला की नजरें टकराईं, दोनों ही स्तब्ध रह गए।

“श्रुति ”,यकायक रोहित के मुंह से निकल पड़ा 

सामने खड़ी महिला यानिकि श्रुति की आंखों में आँसू आ गए। दरवाजे पर खड़ी श्रुति रोहित को एकटक निहारे जा रही थी।एक अरसे बाद रोहित को अपने सामने देखकर वह स्तब्ध थी।

आखिर फिर क्यों जिंदगी, उसे उस मोड़ पर ला खड़ा की जिसे वह कहीं पीछे छोड़कर आगे नए रास्ते पर बढ़ रही थी।

बाहर बारिश तेज़ होने लगी। बारिश की बूंदे जब रोहित पर पड़ी तो उसे भी होश आया, उसने दरवाजे को खटखटाते हुए श्रुति से पूछा- "भीग रहा हूँ श्रुति,अंदर आने के लिए नहीं कहोगी?"

"हां,रोहित अंदर आओ प्लीज्।" ,श्रुति ने खुद को संभालते हुए कहा

वही पुराना औपचारिक लहज़ा ,क़रीने से सजा हुआ घर,आज  भी वही शिफॉन की साड़ी, और माथे पर वही शिकन,वही इक ज़ुल्फ़ जो बार- बार गालों को छुये , वही काली गहरी आँखें जिनमें ढ़ेर सारी उदासी।अगर इस उदासी को छोड़कर देखें तो आज पाँच सालों बाद भी श्रुति बिल्कुल नहीं बदली थी।.......”

दूसरा मौका रिश्तों के इम्तिहान की ऐसी दास्तां है, जो जिंदगी के मुश्किल हालतों में उलझे रिश्तों को आज़माती है। प्यार,दोस्ती, दीवानगी ,जुनून, जुदाई सभी एहसासों को संजोए हुए जज़्बातों की ये दास्तां श्रुति और रोहित के प्यार की कहानी है।

 अपनी गायकी से लाखों दिलों पर राज़ करने वाले रोहित की किस्मत जब श्रुति से टकराई तो उसकी जिंदगी ने एक नई करवट ली। रिश्तों में धोखा खाया हुए रोहित, एक बार फिर से दोस्ती पर भरोसा करने लगा जब श्रुति उसकी जिंदगी में आई। ये सब क़िस्मत का ही खेल था।वरना एक वक़्त में श्रुति रोहित की महज़ एक फ़ैन हुआ करती थी, जो अक़्सर रोहित के शो में जाकर भीड़ के साथ उसकी धुन पर झूमती थी।लेकिन क़िस्मत ने दोनों को एक दूसरे से मिलाया और वो दोस्त बन गए। क़िस्मत ने ही उनकी दोस्ती को एक नया मोड़ दिया।इस नए मोड़ के लिए किस्मत जिम्मेदार थी या श्रुति ये भी एक पहेली थी।

“मैं ख़ुदा का बन्दा हूँ, इसीलिए मुझमें ऐब है।

बे ऐब होता, तो ख़ुद खुदा होता....”

गलतियां किससे नहीं होती।हर इंसान ग़लती करता है।जहाँ कुछ गलतियों को आसानी से सुधारा जा सकता है वहीं कुछ ग़लतियों का अफ़सोस जिंदगी भर सताता है।

 श्रुति ने भी कुछ ऐसी ही गलती की थी जिसने ना सिर्फ़ उसकी, बल्कि रोहित की भी जिंदगी को पलटकर रख दिया था.....

फिर भी रोहित और श्रुति ने क़िस्मत के आगे घुटने नहीं टेके।क़िस्मत हर कदम पर उनका इम्तिहान लेती रही।और वो हर इम्तेहान में निखरते रहे लेकिन एक दिन उन्हें क़िस्मत के आगे हारना पड़ा…

आज फिर पाँच साल बाद, इत्तेफाक से रोहित और श्रुति की किस्मत ने उन्हें, आमने-सामने लाकर खड़ा कर दिया।एक दूसरे से मिलते ही उनका अतीत, उनकी आँखों के सामने, किसी फ़िल्म की तरह चलने लगा।वर्तमान के असमंजस भरे सवाल और अतीत की कड़वी यादें …

क्या फिर एक बार वो क़िस्मत के आगे हार जाएंगे या उसका सामना करके एकसाथ आएंगे?

क्या जिंदगी फिर से, उन्हें  एकसाथ आने का दूसरा मौका देंगी ?

..... चलिये इस सवाल का जवाब ढूंढते हैं इस कहानी में


Writer :- Surbhi Singh

Book Details:-


Dusra Mauka Book Part 1
Book Type :- Paperback
Number of Pages :- 228 Excluding Cover Pages
Genre :- Love Story

Dusra Mauka Book Part 2
Book Type :- Paperback
Number of Pages :- 244 Excluding Cover Pages
Genre :- Love Story

Dusra Mauka Book Part 3
Book Type :- Paperback
Number of Pages :- 228 Excluding Cover Pages
Genre :- Love Story